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*अम्बेडकरवाद: चेतना की जलती मशाल*अम्बेडकरवाद महज़ एक शब्द नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध छेड़ा गया एक निरंतर युद्ध है,यह उन बेड़ियों को तोड़ने का नाम है, जो हमारे पैरों में समाज ने और हमारे दिमाग में अंधभक्ति ने डाली हैं। बाबासाहेब का 'जय भीम' वह गर्जना है जो कायरता को चीरकर स्वाभिमान को जन्म देती है।*1 अम्बेडकरवादी का सबसे घातक शस्त्र* अम्बेडकरवाद भावुकता के सैलाब में बहने का नाम नहीं है, यह तर्क (Reason) की सान पर चखा गया वह सत्य है, जो किसी भी 'कथित महान' व्यक्ति या विचारधारा की पोल खोलने का दम रखता है। *यदि आपके मस्तिष्क में अम्बेडकर के विचार हैं, तो आप कभी किसी के 'अंधभक्त' नहीं हो सकते।* याद रखिए, प्रश्न पूछना क्रांति की पहली सीढ़ी है, और खामोशी गुलामी का पहला संकेत।*2 अंधभक्ति: एक मानसिक कैंसर*जो 'जय भीम' तो कहता है, लेकिन अपने राजनैतिक आकाओं, भ्रष्ट नेताओं या ढोंगी पाखंडियों के गलत कारनामों पर पर्दा डालता है, वह अम्बेडकरवाद का सबसे बड़ा दुश्मन है।क्या आपकी निष्ठा किसी व्यक्ति के प्रति है या बाबासाहेब के सिद्धांतों के प्रति?यदि आप सच बोलने पर चिढ़ते हैं या क्रोध करते हैं, तो समझ लीजिए कि आपने बाबासाहेब को केवल तस्वीरों में सजाया है, चरित्र में नहीं।अंधभक्ति वह वैचारिक गर्त है जहाँ तर्क की मृत्यु हो जाती है।3 *वैचारिक योद्धा बनें,मूक दर्शक नहीं*हमारा कर्तव्य केवल जय भीम का नारा लगाना ही नहीं, बल्कि उन साथियों को भी मुक्त कराना है,जो आज भी 'मानसिक दासता' और 'व्यक्ति पूजा' के अंधकूप में गिरे हैं,उनसे घृणा मत कीजिए, बल्कि अपने तर्कों की चोट से उनके भ्रम के शीशे तोड़िए। अम्बेडकरवाद हमें '*भक्त' नहीं, 'विद्रोही' बनाता है* ऐसा विद्रोही जो अन्याय के सामने हिमालय बनकर खड़ा हो सके।*अंतिम आह्वान*शिक्षित होने का अर्थ केवल अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि सही और गलत के बीच भेद करने की शक्ति है, *यदि हम आज भी कुप्रथाओं, भ्रष्टाचार और गलत राजनीति के गुलाम हैं, तो हमारी शिक्षा व्यर्थ है।*उठो! तर्क करो! और याद रखो कि *अम्बेडकर का सिपाही कभी झुकता नहीं, कभी रुकता नहीं और कभी किसी का अंधभक्त नहीं बनता।*🙏जय भीम नमो बुद्धाय जय अम्बेडकरवादलेखक सोहनलाल सिंगारिया प्राचार्य(RES) एवं सामाजिक कार्यकर्ता ब्यावर प्रदेश उपसभा अध्यक्ष राजस्थान शिक्षक संघ अम्बेडकर
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