बहुजन क्रांति का अदृश्य सेतु मान्यवर दीना बना वाल्मीकि
* बहुजन क्रांति का 'अदृश्य' सेतु मान्यवर दीनाभाना भंगी * * लेखक * सोहनलाल सिंगारिया प्राचार्य (RES) सामाजिक कार्यकर्ता, ब्यावर 94622-60179 sohanlalsingaria@gmail.com भंगी जातियों को तो कुछ मिला ही नहीं, इसका मैं व्यक्तिगत तौर पर शिकार हूँ। ये शब्द किसी साधारण व्यक्ति के नहीं, बल्कि उस महामानव के हैं,जिसने भारतीय राजनीति और सामाजिक व्यवस्था की चूलें हिला देने वाले 'बहुजन आंदोलन' की नींव रखी थी। जिसे इतिहास मान्यवर दीनाभाना भंगी के नाम से जानता है वे केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारत के दो सबसे महान वैचारिक ध्रुवों, डॉ. बी.आर. अंबेडकर और मान्यवर साहेब कांशीराम के बीच के वह अदृश्य सेतु थे, जिनके बिना आज का बहुजन आंदोलन संभव ही नहीं था। * बचपन की वह टीस और स्वाभिमान का बीज * दीनाभाना जी मूल नाम दीनानाथ का जन्म 28 फरवरी 1928 को राजस्थान के जयपुर जिले के बागास गाँव में श्री भाना वाल्मीकि के घर हुआ था। उस दौर में राजस्थान में सामंती प्रथा और जातीय भेदभाव चरम पर था। भंगी समाज की परछाई से भी लोग कतराते थे। दीनाभाना के जीवन में स्वाभिमान की पहली चिंगारी त...